Explainer: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दोस्त इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू दोनों ही कट्टर राष्ट्रवादी हैं। दोनों ही नेता आतंकवाद के धुर विरोधी हैं। इतना ही नहीं, दोनों नेताओं की छवि आतंकियों को उनके घर में घुस कर मारने के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। पीएम मोदी और नेतन्याहू दोनों ही अपने-अपने धर्म और संस्कृति को मानने वाले हैं। दोनों ही नेता आधुनिक टेक्नालॉजी का अधिकतम इस्तेमाल करने में भरोसा रखते हैं। इसीलिए पीएम मोदी और नेतन्याहू में काफी गहरी दोस्ती है। इस वजह से भारत और इजरायल के संबंध लगातार नई ऊंचाइयों को छूते जा रहे हैं। पीएम मोदी और नेतन्याहू की दोस्ती का नतीजा ही है कि इजरायल को अब रूस जैसे दूसरे भरोसेमंद साथी के रूप में देखा जाने लगा है। पीएम मोदी के इजरायल दौरे से पहले नेतन्याहू ने भारत को हेक्सागन एलायंस में शामिल करने की इच्छा जाहिर कर पाकिस्तान को बड़ी चिंता में डाल दिया है।
बुधवार को पीएम मोदी 2 दिवसीय दौरे पर इजरायल की यात्रा पर जा रहे हैं। वह 25 से 26 फरवरी तक अपने दूसरे आधिकारिक दौरे पर इजरायल में रहेंगे। उनके दोस्त और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को मोदी के आने का बहुत बेसब्री से इंतजार है। पीएम मोदी अपने करीब 12 वर्षों के कार्यकाल में दूसरी बार इजरायल जा रहे हैं। इससे पहले वह 2017 में इजरायल गए थे। अब करीब नौ साल बाद उनकी यह इजरायल यात्रा सिर्फ औपचारिक नहीं है, बल्कि रणनीतिक रूप से यह बेहद महत्वपूर्ण है।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को उनके दौरे से पहले ही “ऐतिहासिक” करार दिया है। उन्होंने कहा है कि पीएम मोदी हमारे व्यक्तिगत दोस्त हैं। बता दें कि दोनों नेता फोन पर आपस में नियमित बात करते हैं और एक-दूसरे के देशों का दौरा करते रहे हैं, जो कि उनके बीच मजबूत दोस्ताना संबंधों का प्रमाण है।
पीएम मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू की गहरी दोस्ती को देखते हुए भारत और इजरायल में रूस और भारत जैसी दोस्ती की उम्मीदें प्रबल हो रही हैं। ऐसे में चर्चा है कि क्या वाकई इजरायल भारत का रूस जैसा दूसरा भरोसेमंद रक्षा साझेदार बनने जा रहा है? भले ही रूस और इजरायल दो अलग-अलग देश हैं, लेकिन वह अपने आप में पूरक साझेदार हैं। रूस भारत का पारंपरिक रक्षा साझेदार है। भारत को एसयू-30, टी-90, एस-400 जैसे हथियारों की आपूर्ति करने, ब्रह्मोस मिसाइल का संयुक्त विकास करने और सस्ती कीमतों पर हथियारों व तेल की उपलब्धता ने रूस को भारत का अपरिहार्य और अनंत साथी बनाया है।
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के अनुसार साल 2020-24 के बीच रूस के बाद इजरायल भारत का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है। भारत इजरायली हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार है। इजरायल के कुल निर्यात का 34% हिस्सा भारत लेता है। इजरायल की ताकत केवल हथियारों की आपूर्ति मात्रा में नहीं, बल्कि उसकी क्वालिटी और टेक्नोलॉजी में है। इजरायल की स्पाइक मिसाइल, हेरॉन ड्रोन, बाराक-8, राम्पेज और आइरन डोम जैसी टेक्नोलॉजी रूस के पास भी नहीं है। साल 2025 में पाकिस्तान में आतंकियों के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इजरायली हथियारों ने पाकिस्तान के ठिकानों पर सटीक हमले किए।
भारत और इजरायल ने 2026 के लिए 8.6 बिलियन डॉलर की नई डील की है। इसमें एयर डिफेंस सिस्टम, लेजर बेस्ड आयरन बीम और एडवांस्ड मिसाइलें शामिल हैं। पीएम मोदी के इस दौरे में भारत और इजरायल के बीच एक बड़े सुरक्षा समझौते का नया MoU साइन होने की उम्मीद है। इस समझौते में संवेदनशील टेक्नोलॉजी शेयरिंग और संयुक्त उत्पादन पर जोर दिया जाएगा। इससे भारत की सैन्य ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।
नेतन्याहू भारत को “हेक्सागन एलायंस” में शामिल करना चाहते हैं। उन्होंने हाल ही में पीएम मोदी के सामने इस एलायंस में शामिल होने का प्रस्ताव रखा है। इसमें भारत और इजरायल के अलावा अरब देश, अफ्रीका, ग्रीस और साइप्रस को शामिल करके “रेडिकल शिया और सुन्नी एक्सिस” का मुकाबला किया जाएगा। पीएम मोदी नेतन्याहू के इस विजन को पसंद करते हैं। दूसरा कारण रणनीतिक है। इसके अलावा चीन-पाकिस्तान अक्ष के खिलाफ इजरायल की खुफिया और तकनीकी मदद अनमोल है, जो उनके लिए खतरे की घंटी है। साइबर सुरक्षा, क्वांटम, एआई, ड्रोन स्वार्म में इजरायल को वर्ल्ड लीडर के तौर पर देखा जाता है।
भारत ‘सुदर्शन चक्र’ नाम से अपना एयर डिफेंस सिस्टम बना रहा है, जिसमें इजरायली टेक्नोलॉजी महत्वपूर्ण होगी। इजरायल “नो स्ट्रिंग्स अटैच्ड” और तेज डिलीवरी देता है। 2025-26 में इजरायल ने भारत को जो हथियार दिए, वे ऑपरेशन सिंदूर में बेहतर साबित हुए। इजरायली हथियार अत्याधुनिक, इंटेलीजेंस और संयुक्त विकास वाले हैं। यह दोनों मिलकर भारत को “आत्मनिर्भर” बनाने में मदद करेंगे।
अपने इस दौरे में पीएम मोदी इजरायली संसद (नैसेट) को संबोधित करेंगे। यह इजरायली संसद में भारतीय प्रधानमंत्री का पहला ऐसा संबोधन होगा। इसके बाद वे यद वासेम होलोकॉस्ट स्मारक जाएंगे और इनोवेशन इवेंट में भाग लेंगे। दोनों नेताओं के बीच वार्ता में कृषि, जल प्रबंधन, एआई, स्वच्छ ऊर्जा और FTA के मुद्दे अहम होंगे। भारत और इजरायल के राजनयिक संबंध वैसे तो औपचारिक रूप से 1992 में शुरू हुए, लेकिन 2014 से मोदी युग में यह रिश्ता बेहद मजबूत हो चुका है। इस लिहाजा से 2026 में पीएम मोदी का इजरायल दौरा काफी महत्वपूर्ण है। यहां से भारत-इजरायल के बीच “स्ट्रैटेजिक इंटीमेसी” का नया अध्याय आरंभ होगा। इजरायल पहले से ही भारत का रणनीतिक साझेदार बन चुका है।
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